internet of things (IoT)

Internet of Things (IoT) क्या है और यह कैसे काम करता है ? फायदे तथा नुकसान !

Internet of Things (IoT) क्या है ? इंटरनेट के इस युग में इंटरनेट से चलने वाले devices  के बारे में आप अच्छी प्रकार से अवगत होंगे। जहाँ तक बात Internet of Things (IoT) की है तो इस टर्म को आप कही न कही, कभी न कभी अवश्य ही सुने होंगे।  चूकि, लगभग हम सभी इंटरनेट का इस्तेमाल करते है, तो ऐसे में Internet of Things (IoT) के बारे में हमें अवश्य ही जानकारी रखनी चाहिए।

Technology जिस रफ़्तार से नई-नई चीजों को लोगों के सामने ला रही है, ऐसे में हमें भी उन आविष्कार से अनजान नहीं रहना चाहिए। आप कल्पना कीजिये कि वह संसार कैसा होगा जब आप की हर devices इंटरनेट से जुड़ जाये, और वो सभी एक दूसरे से डाटा का आदान-प्रदान करके आपके काम को आपके ही मनमुताबिक पूरा करे।  चलिए इसे विस्तार से समझते है कि Internet of Things (IoT) क्या है ? यह कैसे काम करता है ? इसका क्या उपयोग है ?

रोज इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरण (devices) को अगर इंटरनेट के साथ जोड़ दिया जाये तो इसे आप Internet of Things (IoT) यानि बस्तुओं का इंटरनेट कहते है।  इसे इस तरह से समझते है।

Internet of Things (IoT) क्या है?

आपके घर में ऐसे कितने device है जो इंटरनेट के साथ connected है।  आपका लैपटॉप, स्मार्टफोन, राऊटर, टेबलेट इत्यादि इंटरनेट से connected हो सकती है।  इसके अलावे आपके घर में smart devices जैसे smartTV, temperature monitor, security cameras भी हो सकते है।  ऐसे में हम रोज नई-नई devices का इस्तेमाल कर रहे है जो इंटरनेट से कनेक्ट हो सकता है।  अब इन सभी devices  जो इंटरनेट के द्वारा जुडी है, को सम्मिलित रूप से या इसके family को हम Internet of Things (IoT) कहते है।

इंटरनेट तो आप पहले से ही अपने मोबाइल में इस्तेमाल करते ही होंगे, उसमे आप गूगल, व्हाट्सप्प, फेसबुक इत्यादि इस्तेमाल करते होंगे। लेकिन Internet of Things (IoT) उससे थोड़ा हटकर है। इसमें physical devices अपने smart features के साथ इंटरनेट के साथ जुड़े होते है।  जो आपके लिए आटोमेटिक काम करते रहते है।

आइये इसे मैं आपको कुछ उदहारण के द्वारा समझाने का प्रयास करता हूँ :-

पहला उदहारण, आप रास्ते में जा रहे है और अचानक आपकी कार का एक्सीडेंट हो जाता है (भगवान् न करे ऐसा हो, बस उदहारण के लिए) और आपके गाड़ी में लगे GPS एक सिगनल उस क्षेत्र के लोकल पुलिस स्टेशन को भेज देता है।  जिसमे  आपकी लोकेशन का GR (ग्रिड रिफरेन्स) दिया हुआ होता है। आपके गाड़ी के जीपीएस से भेजा हुआ सिगनल तुरंत ही वहां के पुलिस स्टेशन में उपस्थित वैसे ही तकनीकी के द्वारा रिसीव कर लिया जाता है।  और आपकी मदद के लिए पुलिस तुरंत ही दुर्घटना वाले स्थान पर पहुंच जाती है।  और इस प्रकार आपकी मदद हो जाती है।

Internet of Things (IoT)

दूसरा उदहारणआज आपको जल्दी-जल्दी में ऑफिस जाना हुआ, आप ऑफिस के लिए तो निकल गए लेकिन जल्दी-जल्दी में घर के सभी दरवाजे ,लाइट्स वगैरह खुला ही छोड़ आये।  अब ऐसे स्थिति में आपके घर में लगा डिवाइस आपको एक मैसेज भेज देता है कि मैंने घर के सभी दरवाजे और लाइट्स बंद कर दिए है।  जैसे ही आप घर पर वापस आये तो इस स्विच को दबाएं, सभी दरवाजे तथा लाइट्स ऑन हो जाएगी।

अब तीसरा उदहारण, आज गर्मी बहुत है।  ऐसे में आप ऑफिस से घर के लिए निकले है।  और आप चाहते है कि घर पहुंचने से पहले आपके कमरे का AC ऑन हो जाये। और आपको कमरा ठंढा हो जाये।  तो आप वही से जहाँ आप है, आप अपने डिवाइस को कमांड दे सकते है। और इस प्रकार आप AC को वही से ऑन करके अपने  कमरे को पहुंचने से पहले ठंढा कर सकते है।

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Internet of Things (IoT) की उत्त्पत्ति:-

सबसे पहले Carnegie Mellon University में Coke Vending Machine को इंटरनेट से जोड़कर Internet of Things (IoT) की अवधारणा की उत्त्पत्ति हुई।  यह अपने आप में सबसे पहला internet-connected डिवाइस था।

IoT शब्द का पहली बार आविष्कार P&G जो बाद में MIT’s Auto ID Centre हुआ, के Kevin Ashton के द्वारा 1999 में किया गया।  रिसर्च आर्टिकल जिसमे Internet of Things (IoT) के बारे में लिखा गया था, को पहली बार नॉर्वे में Nordic Researchers के कांफ्रेंस में जून 2002 में प्रस्तुत किया गया था। वर्ष 2008-09 से यह अधिक चर्चा में आया।

किस प्रकार के डिवाइस को आप IoT के साथ connect कर सकते है :-

IoT डिवाइस को आप रोज उपयोग होने वाले लगभग अनेक devices के साथ connect कर इस्तेमाल कर सकते है।

अधिकतर IoT  devices consumer के इस्तेमाल के लिए बनाई गई है।  जैसे Connected Vehicles, Home Automation, Wearable टेक्नोलॉजी , Internet से Connected health devices इत्यादि।

IoT devices को खासकर स्मार्ट होम के concept पर तैयार किया गया है।  जिसमे लाइट्स, एयर कंडीशनिंग, सिक्योरिटी सिस्टम इत्यादि होती है ।  इसका एक महत्वपूर्ण पहलु यह भी है कि यह अपने आप ही आपके लाइट्स को बंद कर देगा।  इससे आप एनर्जी की भी अधिक से अधिक बचत कर सकते है।

जहाँ तक कमर्शियल इस्तेमाल की बात है तो मेडिकल और हेल्थ केयर में भी IoT devices का इस्तेमाल किया जाता है।  इसका इस्तेमाल रोगी के डाटा कलेक्शन, रिसर्च, मॉनिटरिंग इत्यादि के लिए किया जाता है।  इस डिवाइस के जरिये आप आसानी से रोगी को रिमोटली मॉनिटर कर सकते है।

इस क्षेत्र में बड़े-बड़े हॉस्पिटल smart bed भी तैयार कर रहे है।  जिससे रोगी को आसानी से मॉनिटर किया जा सके।

ऊपर बताये गए सभी टेक्नोलॉजी तभी संभव है जब आप devices को इंटरनेट से जोड़ेंगे। Devices को इंटरनेट से जोड़ने का मतलब यह है कि डिवाइस एक पहचानकर्ता के रूप में IP Address का उपयोग करेगा।  चुकि IoT के व्यापक भविष्य को देखते हुए इसे IPV6   का उपयोग करना होगा।  क्योकि IPv4 में  लिमिटेड एड्रेस लगभग 4.3 बिलियन अलग-अलग एड्रेस के लिए ही अनुमति देता है। और यही कारण है कि IoT के सफल विकास के लिए IPV6 का अहम् योगदान सिद्ध होगा।

जैसे प्रत्येक टेक्नोलॉजी और अविष्कार का फायदा और नुकसान होता है।  ठीक उसी तरह Internet of Things (IoT) का भी कुछ फायदे तो कुछ नुकसान है।  आइये उस पर एक नज़र दाल लेते है।

Internet of Things के फायदे :-

जैसा की उपरोक्त उदहारण से आप समझ गए होंगे कि IoT  आपके जीवन को किस कदर आसान बना देगी।  ऐसा उपकरण जो आपके आवश्यकतानुसार कार्य को पूरा करेगी। तो आने वाले दिनों में IoT लोगो के लिए किसी वरदान से शायद काम नहीं होगा।  ये आपका समय तो बचाएगा ही, साथ ही साथ एक साथ अनेक काम को भी करने में समर्थ होगा।

Internet of Things के नुकसान :-

जहाँ तक इस तकनीकी से नुकसान का सवाल है तो आप कह सकते है कि इस तकनीकी का सबसे बड़ा नुकसान सुरक्षा को लेकर है।  इंटरनेट कितना सुरक्षित है, यह हम किसी से छुपा हुआ नहीं है।  इंटरनेट के जरिये ही आज अधिकतर क्राइम किया जा रहा है।  ऐसे में घर के प्रत्येक डिवाइस को इंटरनेट से जोड़ देना कहा तक सुरक्षित है, यह देखने वाली बात होगी।  साइबर क्राइम की बढ़ती घटना के बीच इस टेक्नोलॉजी के साथ ज्यादा दोस्ती महँगी भी पड़ सकती है।

यह आर्टिकल कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइयेगा।  आपका सुझाव भी सादर आमंत्रित है।  धन्यवाद।

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