new pension system (nps)

अगर ऐसा हुआ तो सरकार New Pension System (NPS) पर पुनः विचार कर सकती है !

New Pension System (NPS) के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन हुआ। जिसमें देश के लगभग सभी यूनियन ने अपना-अपना समर्थन दिया।  इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन का एक ही उद्देश्य था कि New Pension System (NPS) को ख़त्म कर पहले वाली Defined Benefit Pension यानी Old Pension System  को लागू किया जाए। जिसे सरकार ने 22 दिसंबर 2003 के नोटिफिकेशन के जरिये बंद कर दिया था।

चूकि पहले यह केंद्र सरकार  के कर्मचारियों के लिए लागू की गई थी ।  बाद में यह धीरे-धीरे लगभग सभी राज्य (पश्चिम बंगाल को छोड़कर ) ने लागू कर दिया। लेकिन इस पेंशन सिस्टम के अंतर्गत रिटायर होने वाले लोगो को काफी काम पेंशन मिलने लगी।  जिससे जागरूक होकर कर्मचारियों  ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। 

New Pension System (NPS) का सबसे अधिक विरोध National Movement for Old Pension System  (NMOPS) के बैनर तले किया गया। इस संगठन की एक ही मांग है की New Pension System (NPS) को ख़त्म कर ओल्ड पेंशन सिस्टम लो लागू किया जाये।

NMOPS के द्वारा 30 अप्रैल 2018 को रामलीला मैदान, दिल्ली में लाखों की संख्या में पेंशन विहीन जुटकर अपना विरोध दर्ज कराया।  परन्तु सरकार की तरफ से कोई जबाब नहीं आने से इसी संगठन के द्वारा पुनः संबिधान दिवस के दिन यानि 26 नवंबर 2018 को लाखो के संख्या में पेंशन विहीन दिल्ली पहुंचकर सरकार से पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन किया गया। 

फिर भी साकार की तरफ से कोई सकारात्मक जबाब नहीं मिलने से NMOPS के लोगो द्वारा फरबरी 2019 में जंतर-मंतर पर क्रमिक अनशन किया गया। 

इसी तरह  अर्ध सैनिको (BSF,CRPF,CISF,AR,ITBP) के एसोसिएशन ने भी रणवीर सिंह की अध्यक्षता में जंतर-मंतर पर New Pension System (NPS) के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा चुके है। परन्तु सरकार की तरफ से उन्हें भी आश्वाशन के अलावे शायद कुछ और नहीं मिला है। 

विरोध और चुनाव:-

परन्तु यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इन संगठनों के संघर्ष और क्रमिक आंदोलन का ही नतीजा है कि सरकार ने आम चुनाव को देखते हुए आनन-फानन में एक प्रेस कांफ्रेंस कर घोषणा करके अपना contribution 10% से बढाकर 14% कर दिया है।

इसे देखते हुए तो अब ऐसा ही लगता है कि कर्मचारी भी चुनाव के समय ही एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखकर मनवा सकते है। क्योंकि लोकतंत्र में सरकार संख्या बल की ही सुनती है।  जिसकी संख्या बल जितनी अधिक होगी, सरकार उसके आवाज को भी उतने ही सकारात्मक सोंच  के साथ सुनती है।

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अब देखना यह है की आम चुनाव में  NPS होल्डर सरकार के 14% के कंट्रीब्यूशन से खुश हो जायेंगे या NPS के खिलाफ वोटिंग करेंगे। NPS के खिलाफ कर्मचारी का गुस्सा पार्टियों को कितना नुकसान पहुँचाती है यह देखना अभी बाकी है । क्योकि ऐसा दावा है कि New Pension Scheme के अंतर्गत अभी तक लगभग 60 लाख कर्मचारी नियुक्त हो चुके है।  जो New PensionSystem  का विरोध करते है। 

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लेकिन अभी तक  कोई भी बड़ी नेशनल पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में NPS के बारे में कोई भी जिक्र नहीं किया है।  लेकिन इतना तो तय है कि जो भी नेशनल पार्टी इन कर्मचारियों के मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में सम्मलित करेगा उन्हें इस लोकसभा चुनाव में लीड करने में इन कर्मचारियों का सहयोग अवश्य ही प्राप्त होगा। और यही वजह है कि सरकार कर्मचारियों  के इन मुद्दों पर गौर कर सकती है।

बताते चले कि New Pension System के तहत कर्मचारी अपने वेतन का 10% अपने Permanent Retirement Account Number (PRAN) में जमा करता है और इतना ही सरकार या जो भी  नियोक्ता है उसके द्वारा कर्मचारी के PRAN में जमा किया जाता है। 

इस पुरे राशि को पब्लिक सेक्टर फण्ड मैनेजर में बराबर निवेश कर दिया जाता है।  ये फण्ड मैनेजर है – LIC पेंशन फण्ड, SBI पेंशन फण्ड, UTI रिटायरमेंट सोल्युशन। यह पूर्ण रूप से मार्किट आधारित पेंशन प्लान है।  जो मार्किट के उतार-चढाव पर निर्भर करता है। 

चलिए New Pension System (NPS) को  विस्तार से समझते है।

New Pension System (NPS) –

New Pension System यानि की NPS का रेगुलेशन भारत सरकार द्वारा स्थापित पेंशन फण्ड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के द्वारा किया जाता है।  इस स्कीम में आपको 60 साल तक निवेश करना होता है। इसके बाद कुल जमा की गई राशि का 40 प्रतिशत का निवेश कर एक एन्युटी प्लान खरीदना पड़ता है।  जिसमे से प्रतिमाह या प्रतिसाल जैसा आप प्लान चुनते है, के अनुसार आपको पेंशन दी जाती है । बाकी बचे 60% राशि को आप चाहे तो निकाल सकते है।  लेकिन 40% का एन्युटी आपको अनिवार्य रूप  से खरीदना होता है।    

आरम्भ में केंद्र सरकार ने अपने नई भर्तियों ( एयर फाॅर्स, नेवी, आर्मी को छोड़कर) के लिए 01 जनवरी 2004 से नेशनल पेंशन सिस्टम  यानि NPS की शुरुआत की थी।  ताकि कर्मचारियों को दी जाने वाली डिफाइंड बेनिफिट पेंशन योजना के स्थान पर न्यू डिफाइंड contributory पेंशन दी  जाये। जिससे सरकारी खजाने के बोझ को हल्का किया जा सके। 

NPS के सही संचालन के लिए भारत सरकार ने पार्लियामेंट एक्ट के द्वारा 23 अगस्त 2003 को पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) की स्थापना की गई।  और  22 दिसंबर 2003 को भारत सरकार ने Contributory Pension System का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। जिसे अभी New Pension system या National Pension System या NPS के नाम से जानते है। 

चुकि शुरू में यह स्कीम केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए ही थी। परन्तु बाद में 1 मई 2009 में इसे आम नागरिको के लिए भी शुरू कर दी गई।  NPS की  संरचना USA के 401(K) स्कीम से मिलता जुलता है। 

NPS के अंतर्गत आने वाले सभी सब्सक्राइबर्स का रिकॉर्ड और डाटा का रख-रखाव Central Record Keeping Agency (CRA) के द्वारा किया जाता है।  सरकारी कर्मचारियों के लिए tier -I ही default अकाउंट है।  NPS के तहत आप दो तरह के अकाउंट खोल सकते है। 

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Tier-I :-

यह NPS का प्राइमरी अकाउंट है।  Tier-I अकाउंट से आप पैसा नहीं निकाल सकते है, जब तक की आप 60 साल के नहीं हो जाते है।  परन्तु सरकार ने अभी हाल में ही  कुछ शर्तो पर आपके जमा राशि का 25%  निकालने की अनुमति दी है।  शर्त :- 1) यह निकाशी आप इस स्कीम में जुड़ने के 3 साल के बाद की कर सकते है। II) गंभीर बीमारी, बच्चों की शादी, घर का बनाना या खरीदना इत्यादि ।  लेकिन अगर आपके नाम पर अगर पहले से घर है तो आप इस अकाउंट के पैसे नहीं निकाल सकते है। पुरे नौकरी के दौरान केवल तीन बार ही आप पैसे निकाल सकते है। पैसे की निकासी आप केवल अपने Contribution का ही 25% कर सकते है।  NPS के द्वारा दिए जा रहे टैक्स बेनिफिट का लाभ केवल टियर-I अकाउंट के लिए ही वैध है।

Tier -II :-

PFRDA ने बाद में  Tier-II अकाउंट लांच किया जो एक बैंक के सेविंग अकाउंट के ही सामान कार्य करता है।  इस अकाउंट से आप कभी ही जब जरुरत हो पैसा निकाल सकते है।  Tier-II अकाउंट केवल सब्सक्राइबर के द्वारा ही खोला जा सकता है।

जिस तरह से NPS का लगातार विरोध बढ़ता जा रहा है।  ऐसे में सरकार को अवश्य ही इस Stakeholders के साथ विचार कर उचित निर्णय लेना चाहिए। नहीं तो अगर कर्मचारी लगातार विरोध ही करते रहे तो सरकार तो ऐसे भी नुकसान हो ही जायेगा। कामकाजी लोगो के लिए काम का माहौल प्रदान करना भी सरकार का ही काम है।  अतः बिना देर किये अब इन संगठनों के साथ बैठकर कोई तो बीच का रास्ता निकाला जा सकता है।  उम्मीद है की सरकार अवश्य ही विचार करेगी।           ।।।।धन्यवाद ।।।।  

3 thoughts on “अगर ऐसा हुआ तो सरकार New Pension System (NPS) पर पुनः विचार कर सकती है !”

  1. Santosh Rathore

    nos government servant ke liye bahut hi hanikarak he nos me salary se hone vala deduction+ 1o%govenment share par month jama nahi hota isse subscribe ko intrest me loss hota he . or retirement par milne vale amount me kami aati he,isliye government servenat ke safe future ke old pension scheame lagu karni chahiye

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